हड़-हड़ मोदी... घड़-घड़ मोदी...
‘अबकी बाड़ ताे बस एक ही चीज का इंतजाड़ है। कयामत के दिन का। कांगड़ेस के लिए कयामत का दिन। जब मोदी अपनी सड़काड़ बनाएंगें।’ सहकर्मी टीवी पर मोदी का भाषण सुनने के बाद बोला। तुम कैसे कह सकते हो कि मोदी सरकार बना ही लेंगे। ‘सड़, आपको मालूम नहीं है। गुजड़ात में, उत्तड़पड़देश में, बनाड़स में, पूड़े देश में मोदी की ही लहड़ है।’ वह बोला। यह सब तो मोदी का ही फैलाया आभामंडल है। ‘नहीं सड़, इस बाड़ देश में चमत्काड़ होगा। देख लेना। कांगड़ेस का सूपरा साफ होगा। भाजपा का सड़काड़ होगा।’ लेकिन आप तो आप समर्थक थे ना... ‘केजड़ी ने दिल तोर दिया है सड़। हड़ जगह थप्पर खा रहे हैं। कुछ हमाड़ी भी तो इज्जत है...’ तो इज्जत के लिए तुमने आदर्शों से समझौता कर लिया। ‘सड़ अापको पूड़ी स्टोड़ी मालूम नहीं है। बताने का समय भी नहीं है। बस इतना जान लीजिए- अबकी बाड़, मोदी सड़काड़’ अरे मेरे भाई, सुनो तो सही... ‘बहुत हुआ अब अत्याचाड़, अबकी बाड़, मोदी सड़काड़। हड़-हड़ मोदी... घड़-घड़ मोदी...’ बोलते हुए सहकमी स्टार न्यूज में खो गया। मोदी जी का लाइव भाषण चल रहा था। मुझे एक शेर याद आ रहा था... कयामत आएगा तो आने दो, हम बच जाऊं...








